वो जो चांद से मिल रहा है ताप तुमको
वो जो निकल रहा है बन के भाप तेरा
बस कह रहा है यही
अभी तो सौदाई नई नई है ।
वो जो तुम्हारी नयन खिड़कियां
खामोश लब से कर रही है बातें
बस कह रही है यही
अभी तो असर नई नई है ।
वो जो लग रही है फिजाँ नई नई तुमको
वो जो धड़क रही है धड़कने तेरे दिल में उसकी
बस कह रही है यही
अभी तो उल्फ़त नई नई है ।
वो जो रतियाँ न गुजर रही है तेरी
वो जो आंखों के निकल आए हैं डोरे
बस कह रही है यही
अभी तो दीवानगी नई नई है ।
वो जो निकल रहा है बन के भाप तेरा
बस कह रहा है यही
अभी तो सौदाई नई नई है ।
वो जो तुम्हारी नयन खिड़कियां
खामोश लब से कर रही है बातें
बस कह रही है यही
अभी तो असर नई नई है ।
वो जो लग रही है फिजाँ नई नई तुमको
वो जो धड़क रही है धड़कने तेरे दिल में उसकी
बस कह रही है यही
अभी तो उल्फ़त नई नई है ।
वो जो रतियाँ न गुजर रही है तेरी
वो जो आंखों के निकल आए हैं डोरे
बस कह रही है यही
अभी तो दीवानगी नई नई है ।
गज़ल के तदवीर नए-नए हैं
जवाब देंहटाएंइसकी तस्वीर नई-नई है,
कहने के अंदाज नए-नए हैं
भावों की मुस्कान नई-नई है.
🍃👍
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