हर चेहरे पे चढ़ा इक चेहरा है ,
हर किसी को आईने की जरूरत है ।
वो जो खुद में नहीं है रास्ते आम बता रहा है
गजब तो ये है न वो समझ रहा है न ये सुन रहा है
झंझट को बना के पहरा ढूँढता सुकूने ज़िन्दगी है
कोई बताना भी चाहे तो बताए कैसे वो सुनता भी नहीं है
बात इतनी सी है और कयामत किए जा रहा है
सच तो ये है वो खुद पर सितम किए जा रहा है
ये कौन सा दौर है ये कौन सा दयार है
अभी यहां था अभी वहाँ भागे जा रहा है
गजब तो ये है वो सुन भी नहीं रहा है ।
हर किसी को आईने की जरूरत है ।
वो जो खुद में नहीं है रास्ते आम बता रहा है
गजब तो ये है न वो समझ रहा है न ये सुन रहा है
झंझट को बना के पहरा ढूँढता सुकूने ज़िन्दगी है
कोई बताना भी चाहे तो बताए कैसे वो सुनता भी नहीं है
बात इतनी सी है और कयामत किए जा रहा है
सच तो ये है वो खुद पर सितम किए जा रहा है
ये कौन सा दौर है ये कौन सा दयार है
अभी यहां था अभी वहाँ भागे जा रहा है
गजब तो ये है वो सुन भी नहीं रहा है ।