आंखों में पानी है
होठों पे तराना है
रुकने की चाहत है
और उस पार भी जाना है
उदास है जिंदगानी
सफर मंजिल का जारी है
जाना मुझको होगा
यही रीत जमाना है ।
होठों पे तराना है
रुकने की चाहत है
और उस पार भी जाना है
उदास है जिंदगानी
सफर मंजिल का जारी है
जाना मुझको होगा
यही रीत जमाना है ।
वाह लाजवाब।
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