हर तरफ कोहराम है ,अजब दौरे हयात है
लगा के खुद पे बंदिश रहा करो ।
बहुत बँट चुके थे फासलों में तुम
अब जो मिला है वक्त तो गुफ़्तगू भी किया करो
बेहतर है घर में ही रहा करो ।
ज़िन्दगी शाम है ,हो रही सुबह का इंतजार है
जब तक न गुजर जाए रात ये
तुम नींद में ही रहा करो
बेहतर है घर में ही रहा करो ।