शनिवार, 5 जनवरी 2019

उल्फ़त नई नई है (ग़ज़ल )

 वो जो  चांद से मिल रहा है ताप  तुमको
 वो  जो निकल रहा है बन के भाप  तेरा
 बस कह रहा है यही
अभी तो सौदाई नई  नई  है ।

 वो जो  तुम्हारी नयन खिड़कियां
 खामोश लब से कर रही है बातें
बस कह रही है यही
अभी तो असर नई नई है ।

 वो जो  लग रही है फिजाँ नई नई तुमको
 वो जो  धड़क रही है धड़कने  तेरे दिल में उसकी
 बस कह रही है यही
अभी तो उल्फ़त नई  नई है ।

वो जो रतियाँ न  गुजर रही है तेरी
वो जो आंखों के निकल आए हैं डोरे
बस कह रही है यही
अभी तो दीवानगी नई नई  है ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. गज़ल के तदवीर नए-नए हैं
    इसकी तस्वीर नई-नई है,
    कहने के अंदाज नए-नए हैं
    भावों की मुस्कान नई-नई है.

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