सोमवार, 17 दिसंबर 2018

बात (कविता )

बात! जो शब्दों से हो रही है ,
         परेशानियाँ कम सी गयी हैं ।
वक्त की थपकियों को -
        पूरी पूरी सुनता हूँ ।
बहुत कुछ करना चाहता हूँ ,
       बहुत कुछ चलता रहता है ।
बंद हो गयी है भागा दौड़ी,
      मगर और ज्यादा चलता हूँ ।
अक्सर जागता रहता हूँ ,
      कुछ बुनता रहता हूँ ।
शब्द मुझसे और मैं शब्दों से-
       बातें करता ही रहता हूँ ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आज के समय में जब पूरी दुनिया वक्त से आगे निकल जाने की होड़ में लगी है, आपके द्वारा वक्त की थपकियों को पूरा पूरा सुनना समय के साथ आपके तालमेल को दर्शाता है। शब्दों के द्वारा लोग अपने मनोविचारों को एक दूसरे पर लादने को लालायित रहते हैं, यहां कवि अपने मन की गुत्थियों को अपने मन में ही घुमरने देता है और उस पर आत्मानंद प्राप्त करता है। समस्त कविता आनंदप्रद एवं विचार प्रधान है।

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