मेरे अंतस में विचारों के आवागमन का रफ्तार बढ़ गया है
भावों का मार्च जारी है
और इस दौरान इसका संपर्क कई विचारों से हुआ
कुछ ने टोका, कुछ ने डांटा, कुछ ने चेताया ...
फिर मैंने समझा
जुबाँ पे लगाम का अर्थ है
शब्दों को तमीज की नसीहत देना
वर्ना रौंदे कुचले जा सकते हैं
एक ही जंग में बंदूक और कलम के सिपाही
इस कदर मेरा अंतस मुझे बताता है
कि सवालों और जवाबों का एक निर्धारित लक्ष्य है
जहां पहुँचकर वे मिट जाते हैं ,
तब कौतूहल के साथ विचारों का मरना एक स्वाभाविक क्रिया जान पड़ता है ।
भावों का मार्च जारी है
और इस दौरान इसका संपर्क कई विचारों से हुआ
कुछ ने टोका, कुछ ने डांटा, कुछ ने चेताया ...
फिर मैंने समझा
जुबाँ पे लगाम का अर्थ है
शब्दों को तमीज की नसीहत देना
वर्ना रौंदे कुचले जा सकते हैं
एक ही जंग में बंदूक और कलम के सिपाही
इस कदर मेरा अंतस मुझे बताता है
कि सवालों और जवाबों का एक निर्धारित लक्ष्य है
जहां पहुँचकर वे मिट जाते हैं ,
तब कौतूहल के साथ विचारों का मरना एक स्वाभाविक क्रिया जान पड़ता है ।
वाह, आज के टूटते समय में एक बेजोड़ कविता से साक्षात्कार मन को सुकून देती है।
जवाब देंहटाएंशब्दों को तमीज देने की बनावटी नाटक का अच्छा मंचन किया है आपने।